संकट में भारतीय तीरंदाजी, इंटरनेशनल चैंपियनशिप से लग सकता है बैन

सुप्रीम कोर्ट ने बीते सोमवार को आर्चरी असोसिएशन ऑफ इंडिया (AAI) के एक धड़े द्वारा मान्यता देने की अपील खारिज़ कर दी। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद भारतीय तीरंदाजी पर संकट मंडराता दिख रहा है। वर्ल्ड आर्चरी ने भारत को अपने दोनों धड़ों के बीच के विवाद को खत्म करने के लिए 31 जुलाई तक का वक्त दिया है।

अगर अगले तीन हफ्तों में कोई विकल्प नहीं निकला तो वर्ल्ड आर्चरी भारत को सस्पेंड कर देगी और इसके चलते भारतीय तीरंदाज इंटरनेशनल कंपटिशन में भाग नहीं ले पाएंगे।

दिल्ली हाईकोर्ट जाएं

गौरतलब है कि ट्राइबल अफेयर्स के यूनियन मिनिस्टर अर्जुन मुंडा के नेतृत्व वाले धड़े जिसके सेक्रेटरी जनरल वरिंदर सचदेवा हैं, ने अपनी अर्जी में कहा था कि उनके धड़े के पास बहुमत है इसलिए उन्हें मान्यता मिलनी चाहिए।

लेकिन हिंदुस्तान टाइम्स के मुताबिक सचदेवा का कहना है कि सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें दिल्ली हाईकोर्ट जाने का आदेश दिया है। सचदेवा ने कहा,

हमें नहीं पता कि इस मसले को हल करने में कितना वक्त लगेगा। लेकिन ऐसा पक्का लग रहा है कि हम 31जुलाई की डेडलाइन मिस कर देंगे।

ऐसे हैं हालात

दूसरे धड़े को रिटायर्ड IAS ऑफिसर BVP राव लीड कर रहे हैं जहां महा सिंह सेक्रेटरी जनरल के रोल में हैं। दोनों ही धड़ों ने बीती 9 जून को चुनाव कराए थे और इन दोनों में स्पोर्ट्स मिनिस्ट्री के ऑब्जर्वर नहीं थे। सचदेवा ने जहां दिल्ली में चुनाव कराया वहीं महा सिंह ने चंडीगढ़ में।

हालांकि इंडियन ओलंपिक असोसिएशन (IOA) ने दिल्ली में हुए चुनावों में अपने ऑब्जर्वर के रूप में साइक्लिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया के सेक्रेटरी जनरल ओंकार सिंह को भेजा था। इसके बाद उन्होंने इस धड़े को मान्यता दे दी थी।

फेल हुई वर्ल्ड आर्चरी

आर्चरी के पूर्व गवर्नमेंट ऑब्जर्वर संजीव सिंह ने हिंदुस्तान टाइम्स से बात करते हुए इन हालात पर अफसोस जताते हुए कहा,

निश्चित तौर पर आर्चरी असोसिएशन ऑफ इंडिया सस्पेंड हो जाएगी और इसका असर टोक्यो ओलंपिक के लिए हमारी तैयारियों पर पड़ेगा। इंडिया को बैंकॉक में होने वाले ओलंपिक क्वॉलिफिकेशन इवेंट एशियन चैंपियनशिप में भाग नहीं लेने दिया जाएगा।

गौरतलब है कि भारतीय रिकर्व टीम ने पिछले महीने नीदरलैंड्स में हुई वर्ल्ड चैंपियनशिप में ओलंपिक कोटा हासिल कर लिया था। अब टीम को बस मिक्स्ड और विमिंस टीम इवेंट में कोटा हासिल करना है।

बीते जून में वर्ल्ड आर्चरी ने अपने वाइस-प्रेसिडेंट काज़ी उद्दीन अहमत चापोल को समझौते के लिए भेजा था लेकिन वह भी फेल रहे।

प्रतीकात्मक फोटो, सोशल मीडिया से साभार

Author: हिंदी में स्पोर्ट्स

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