अमित पंघाल Exclusive : PUBG में पसंदीदा तो गन ही होगी… मुक्के से इतना डैमेज नहीं होता ना

साल 2017 का अगस्त महीना, इसी साल नेशनल लेवल पर अपना बॉक्सिंग डेब्यू करने वाला 21 साल का एक लड़का घर से हजारों किलोमीटर दूर जर्मनी के हैम्बर्ग शहर की एक दुकान में खड़ा एक जोड़ी जूते को घूर रहा था। यह बॉक्सिंग रिंग में पहने जाने वाले जूते थे जो इस लड़के के दिल में बस गए थे। हरियाणा के रोहतक के पास के मयना गांव के रहने वाले इस लड़के को यह जूते कैसे भी हासिल करने थे लेकिन उसकी जेब उसे ऐसा करने से रोक रही थी।

आखिरकार लड़के ने काफी देर सोचने के बाद साथ में घूम रहे अपने दोस्त से कहा, ‘मुझे ये जूता लेना है, पैसे कम हैं। मुझे पैसे दे, तुझे घर जाकर वापस कर दूंगा।’ इस तरह दोस्त से उधार लेकर रिंग शू खरीदने वाले इस लड़के ने अगले 21 महीनों में ऐसे करारे मुक्के मारे कि इंडियन बॉक्सिंग को उनका नया पोस्टर बॉय मिल गया।

इंडियन बॉक्सिंग का पोस्टरबॉय

अमित पंघाल नाम के इस छोटे (बॉक्सिंग के लिहाज से) से, शर्मीले लड़के ने 2017 में जर्मनी में उधार के पैसों से जूता खरीदने के बाद यहीं पर हुई वर्ल्ड चैंपियनशिप के क्वॉर्टर-फाइनल में ओलंपिक चैंपियन हसनबॉय दुस्मातोव से लगातार दूसरी बार हारने के बाद इंडियन नेशनल बॉक्सिंग टीम के हाई परफॉर्मेंस डायरेक्टर सैंटियागो नीवा से कहा, ‘अगली बार जहां भी मिलेगा, इसे मैं वहीं हराऊंगा’।

जो कहा वो किया… इस हार के बाद से पंघाल ने दुस्मातोव को लगातार दो बार पीटा है और अब तो पंघाल का साफ कहना है कि दुस्मातोव उनसे डरने लगा है। पंघाल ने पिछले साल जकार्ता में हुए एशियन गेम्स की 49Kg कैटेगरी में गोल्ड मेडल जीता।

अमित पंघाल

बदली कैटेगरी

इस गोल्ड के बाद उन्होंने फरवरी 2019 में यूरोप के सबसे पुराने बॉक्सिंग टूर्नामेंट स्ट्रांजा मेमोरियल का गोल्ड मेडल भी अपने नाम किया। लगातार दो इंटरनेशनल इवेंट्स में गोल्ड जीतने के बाद जब शुरू से इसी कैटेगरी में खेल रहे पंघाल टोक्यो2020 ओलंपिक्स में गोल्ड की उम्मीद कर रहे थे तभी मार्च 2019 में आई एक खबर ने उन्हें चौंका दिया।

खबर ये थी कि इंटरनेशनल बॉक्सिंग असोसिएशन (AIBA) ने वेट कैटेगरीज में बदलाव कर कई कैटेगरीज को खत्म कर दिया। खत्म होने वाली कैटेगरीज में पंघल की कैटेगरी भी शामिल थी। अब पंघल को 52Kg कैटेगरी में खेलना था। पंघल के कोच अनिल धनखड़ के मुताबिक यह बदलाव मुश्किल था क्योंकि छोटी हाइट और मजबूत लेकिन हल्के शरीर के पंघल के लिए एकाएक वजन बढ़ाना और फिर उन बॉक्सर्स से भिड़ना जो लंबे वक्त से उसी वजन के साथ खेल रहे हों…आसान नहीं था।

खैर पंघाल ने वजन बढ़ाया और नई वेट कैटेगरी में उनका पहला टूर्नामेंट अप्रैल में बैंकॉक में हुई एशियन चैंपियनशिप थी। साल 2017 की एशियन चैंपियनशिप में 49Kg का ब्रॉन्ज मेडल जीतने वाले पंघल इस बार नई कैटेगरी, 52Kg में उतरे थे।

नई कैटेगरी में पुराने पंघाल

कैटेगरी भले ही बदल गई हो लेकिन पंघाल अब भी वही थे। एशियन चैंपियनशिप में कमाल का प्रदर्शन करते हुए पंघाल ने लगातार मुकाबलों में ओलंपिक चैंपियन दुस्मातोव, ओलंपिक ब्रॉन्ज मेडलिस्ट चाइनीज बॉक्सर हु जियनघुआन और फिर वर्ल्ड चैंपियनशिप के ब्रॉन्ज मेडलिस्ट कोरियन किम हिंक्यू को पीटकर गोल्ड मेडल जीता।

एशियन चैंपियनशिप के गोल्ड मेडल के साथ अमित

अपनी नई कैटेगरी के पहले ही इवेंट में गोल्ड मेडल जीतने के बाद अमित ने इसी हफ्ते गुवाहाटी में खत्म हुए इंडिया ओपन में एकतरफा गोल्ड मेडल जीता। इस दौरान कोई भी बॉक्सर उन्हें चुनौती देता नहीं दिखा। इस गोल्ड मेडल को जीतने के बाद ट्रेनिंग के लिए इटली निकलने से पहले हमने पंघाल से बातचीत की।

हमारे एक्सक्लूसिव सवालों और अमित पंघाल के जवाबों के जरिए आप भी जानें इंडियन बॉक्सिंग के इस नए पोस्टरबॉय के बारे में…

Q- इस साल के पहले ही पांच महीनों में लगातार तीन इंटरनेशनल इवेंट्स में गोल्ड मेडल…कैसा फील हो रहा है?

काफी अच्छा फील हो रहा है। जो स्ट्रैटेजी बनाते हैं, जो प्रैक्टिस किया है वो सब काम आई तो बहुत ही अच्छा लग रहा है और कॉन्फिडेंट लेवल काफी हाई हुआ है इससे।

Q- आपने इंडिया ओपन का गोल्ड मेडल जीतने के बाद कहा था कि आपने अब तक जितने बॉक्सर्स का सामना किया है सचिन सिवाच उनमें सबसे लंबे हैं तो क्या आपने सचिन के खिलाफ कुछ खास तैयारी की थी?

स्पेशल तैयारी ये थी कि हम पहले खेल चुके हैं। पहले इंडिया कैंप में हमारा एकसाथ ट्रायल हो चुका है तो मुझे पता था कि मुझे उसी तरह से खेलना है जैसे मैं पहले खेला था। स्ट्रैटेजी यही थी कि जितना हो सके क्लोज रहना है। हम जितना क्लोज रहेंगे उतना ही ज्यादा फायदा है। मुख्य बात यही थी कि जितना साथ में रहकर खेलेंगे उतना सही रहेगा।

Q- PUBG में आपका पसंदीदा हथियार फिस्ट (मुक्का) ही है ना?

हंसते हुए… जी PUBG तो.. मैं कभी-कभी टाइम मिल जाता है तो खेलता हूं। इतना ज्यादा नहीं खेलता। अभी कंपटिशन है तो मैं कम ही खेलता हूं। संडे वगैरह को खूब खेलता हूं। पसंदीदा तो उसमें गन ही होगी… मुक्के से उसमें इतना डैमेज नहीं होता है ना।

4- इतना सारा स्ट्रगल किया…पसंदीदा जूते खरीदने के पैसे ना होने से लेकर एक साल के अंदर तीन इंटरनेशनल गोल्ड मेडल्स तक की जर्नी कैसी रही आपकी?

काफी अच्छा लगता है। पहले मेरे पास पैसे नहीं थे कि अपने लिए जो मेरे पसंदीदा रिंग शू हैं वो खरीद सकूं। मुझे एक जूता काफी पसंद आया था तब मैंने कविंद्र (साथी बॉक्सर) जो नौकरी कर रहा था, उससे पैसे लिए थे और बोला था मैं बाद में घर जाकर वापस कर दूंगा। उनसे पैसे लेकर मैंने अपने रिंग शू लिए थे। उसके बाद मैंने और टफ प्रैक्टिस शुरू कर दी कि अब मुझे अपने और अपने घर-परिवार के लिए काफी कुछ करना है। वहां से मैंने खुद को बॉक्सिंग में झोंक दिया और फिर कॉमनवेल्थ गेम्स का गोल्ड मेडल जीतने पर हरियाणा सरकार से जो प्राइज मनी मिली उससे मैंने पापा को टोयोटा फॉर्च्यूनर खरीदकर गिफ्ट की। पहले से ही मैंने सोच रखा था कि कभी कुछ करेंगे तो पापा को ये फॉर्च्यूनर गाड़ी जरूर गिफ्ट करेंगे।

Q- साल 2017 की वर्ल्ड चैंपियनशिप में हसनबॉय दुस्मातोव के खिलाफ मिली हार के बाद आपने कोच से कहा था कि इसे तो मैं हराकर ही रहूंगा, खुद पर इतना भरोसा था या फिर कोच के गुस्से से बचने के लिए ऐसे ही बोल दिया था?

ये इसलिए बोला क्योंकि उनका गेम हम समझने लगे थे। लगातार दूसरी बार हारे थे और उनका गेम अब काफी समझ आ चुका था। तो ये था कि अगली बार कभी भी इनसे भिड़े तो इसके खिलाफ जो स्ट्रैटेजी बनाएंगे वो कामयाब होगी, इसका गेम समझ आ गया है और इसको आराम से हरा दूंगा यही सोचा था

अमित पंघाल, नीली जर्सी में

Q- एशियन चैंपियनशिप में आपने लगातार दुस्मातोव, जियनघुआन और फिर किम हिंक्यू को हराकर गोल्ड मेडल जीता। ये तीनों अपनी कैटेगरी में दुनिया के टॉप बॉक्सर्स में से एक हैं. आपने इनके खिलाफ क्या खास तैयारी की थी और इस जीत से आपका कॉन्फिडेंस कितना बढ़ा?

हसनबॉय के खिलाफ तो मैं पहले भी खेल चुका था तो उसके खिलाफ तो हमारी स्ट्रैटेजी वही पुरानी ही थी। लेकिन सेमीफाइनल में जियनघुआन और फाइनल में कोरिया के किम हिंक्यू के खिलाफ .. चूंकि वो लंबे बॉक्सर थे तो हमने ये स्ट्रैटेजी बनाई थी कि क्लोज रहेंगे। स्पेस नहीं देंगे क्योंकि बॉक्सिंग टेक्नीक यह है कि लंबे बॉक्सर के करीब रहेंगे, उसे स्पेस नहीं देंगे तो फायदा होगा। सामने वाला बॉक्सर ब्लॉक हो जाएगा, पंच नहीं खोल पाएगा। तो यही स्ट्रैटेजी थी, हम इसी पर गए थे कि उनके क्लोज रहकर जितने पंच जमा पाएंगे हमारा उतना फायदा होगा। बाकी कॉन्फिडेंस लेवल तो आप देख ही सकते हैं कि इसके बाद एक और गोल्ड आ गया है। इतना अच्छा गोल्ड लिया था, ओलंपिक और वर्ल्ड चैंपियनशिप के मेडलिस्ट को हराकर और फिर यहां इंडिया ओपन में एकतरफा गोल्ड जीता तो कॉन्फिडेंस लेवल काफी अच्छा है।

Q- एशियन चैंपियनशिप के बाद टीम इंडिया के हाई परफॉर्मेंस डायरेक्टर नीवा ने कहा था कि आपको लॉन्ग डिस्टेंस से क्लोजर रेंज में ट्रांजीशन पर काम करने की जरूरत है, अब आपने एक और गोल्ड जीत लिया है तो क्या एशियन चैंपियनशिप के बाद आपने इस ट्रांजिशन पर खासतौर से ध्यान दिया था, या फिर पहले वाले तरीके से ही चल रहे हैं?

पहले भी हम लोग इस पर काम करते थे लेकिन पहले मेरा जो गेम था वो काउंटर गेम था। लेकिन अभी हम इस चीज पर काम कर रहे हैं कि ये जो डॉमिनेट बॉक्सिंग है अब हम इस पर जाएंगे और हम एशियन चैंपियनशिप के बाद से लगातार इस पर काम कर रहे हैं। हमने इंडिया ओपन में भी इस पर काम किया है और आगे भी इस पर काम करेंगे।

Q- नीवा को लगता है कि आप टोक्यो में मेडल के दावेदारों में शामिल हैं, आपकी हालिया फॉर्म से लोग भी इस बात से सहमत हैं लेकिन बॉक्सर पंघाल का इसपर क्या कहना है? आपको खुद से कितनी उम्मीद है?

जी बिल्कुल पूरी उम्मीद है और मैं यही चाहूंगा कि अपने देश के लिए ओलंपिक्स में अच्छे से अच्छा मेडल लेकर आऊं।

Q- यूरोप के सबसे पुराने एमेचर बॉक्सिंग टूर्नामेंट स्ट्रैंजा मेमोरियल में आप लगातार दो बार गोल्ड मेडल जीत चुके हैं एक और गोल्ड जीतते ही आप बुल्गारियन ग्रेट सेराफिम टोडोरोव की बराबरी कर लेंगे, इतनी छोटी सी उम्र में इतनी बड़ी उपलब्धि के इतने करीब होने पर कैसा लग रहा है?

जी काफी अच्छा लग रहा है लेकिन मैंने पहले दो गोल्ड 49Kg कैटेगरी में जीते हैं और अभी मैं 52Kg खेलता हूं। वैसे तो मैं पूरा एफर्ट लगाता हूं लेकिन यूरोप के बॉक्सर काफी अच्छे होते हैं और मैंने उनके साथ अभी 52Kg में इतना नहीं खेला है। आगे जैसे-जैसे कंपटिशन आते रहेंगे, हम खेलते रहेंगे गेम बेहतर होगा और उम्मीद है कि तीसरा गोल्ड भी हम लेकर ही आएंगे।

Q- अपने बचपन के हीरो धरम पाजी से मिलने पर आपने उनसे सबसे पहले क्या पूछा, क्या बात की?

मैंने उनसे यही पूछा था कि आपकी सक्सेस का क्या राज है? उन्होंने जवाब दिया कि, जमीन से जुड़े रहना, अपना व्यवहार कभी मत बदलना। लोगों का प्यार अपने आप आपकी तरफ आता रहेगा। आप जितने सिंपल रहेंगे लोग उतने ही ज्यादा आपके करीब रहेंगे।

Q- आप बचपन से लेकर आर्मी जॉइन करने से पहले तक बहुत शैतान थे…उस वक्त की कोई ऐसी याद जिसके आने पर आप आज भी मुस्कुरा उठते हों?

हंसते हुए… जी वैसे तो ऐसी यादें बहुत सारी हैं… ऐसे ही खेलते रहते थे, शरारत करते रहते थे। कभी किसी को छेड़ दिया, तो किसी के साथ भिड़ गए। अकैडमी में अक्सर हम किसी बॉक्सर के पास जाते थे और उससे कहते थे कि देख वो बॉक्सर तेरे से फाइट के लिए बोल रहा है। कह रहा है कि तू उससे डरता है, फाइट नहीं कर सकता। और फिर दूसरे वाले को भी जाकर यही सब बोल देते थे। और फिर उनकी आपस में फाइट करवाकर हम सारे काफी मजा लेते थे। ये हमने कई बार किया है।

Q- आपका पसंदीदा बॉक्सर कौन है?

अभी खेल रहे बॉक्सर्स में मुझे यूक्रेन के वासिल लोमाचेंको काफी पसंद हैं। मुझे दो बार के ओलंपिक चैंपियन लोमाचेंको की पंचिंग स्पीड और एक्यूरेसी काफी पसंद है। मैं उनको काफी फॉलो करता हूं, उनकी काफी सारी बाउट्स देखी हैं।

Q- आपके कोच अनिल धनखड़ को इस बार भी द्रोणाचार्य अवॉर्ड के लिए नॉमिनेट नहीं किया गया जिसपर आपने सख्त ऐतराज भी जताया था, क्या आपके ऐतराज के बाद फेडरेशन ने आपकी इस मांग पर कोई कदम उठाया?

नहीं, अभी तो कुछ नहीं हुआ है। मैंने बोल दिया था कि इस बार तो गलती हो गई लेकिन अगली बार मैं पहले ही बॉक्सिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया (BFI) को बोल दूंगा कि मेरे कोच का नाम द्रोणाचार्य अवॉर्ड के लिए भेजा जाए।

Q- अगर नहीं तो क्या आप इस मामले को सच में कोर्ट में ले जाएंगे, जैसा कि आपने इस महीने की शुरुआत में कहा था?

कोर्ट जाने की बात ऐसी थी कि अगर सभी मिलकर बोलते कि ऐसा है कि कोर्ट जाना है हमारा हक़ है तो ठीक है नहीं तो मैं BFI को ज्यादा परेशान नहीं करना चाहता। अपने मन से वह नॉमिनेट करेंगे तो ज्यादा बेहतर होगा। सभी के साथ मिले तो सम्मान भी अच्छा लगेगा। अब अकेले में लेना चाहें तो हम अभी भी ले सकते हैं, कोई मना नहीं कर सकता पॉइंट्स सबसे ज्यादा हैं हमारे लेकिन BFI के जरिए मिलेगा तो उसका अलग ही महत्व रहेगा, अलग ही मजा रहेगा।


Author: सूरज

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