Exclusive : पैसों के लिए बार-बार चक्कर काटने के बाद यूनिवर्सिटी गेम्स में उतर पाएगी नेशनल रिकॉर्ड होल्डर

पैसों के लिए बार-बार सिफारिश करने और चक्कर काटने के बाद कहीं जाकर मौजूदा समय में झारखंड की सबसे प्रतिभाशाली एथलीट और जूनियर लेवल पर लॉन्ग जंप की नेशनल रिकॉर्ड होल्डर प्रियंका केरकेट्टा वर्ल्ड यूनिवर्सिटी गेम्स में भाग ले सकेंगी।

पैसे जमा करने की लास्ट डेट निकलने के बाद भी 2.5 लाख रुपये इकट्ठा करने में नाकाम रहने वाली प्रियंका ने 26 अप्रैल तक का वक्त मांगा था। इसके बाद शुरू में हाथ खड़े करने वाली रांची यूनिवर्सिटी ने डेडलाइन खत्म होने से कुछ घंटे पहले (25 अप्रैल शाम 4:30 बजे यूनिवर्सिटी ने पैसे देने की हामी भरी थी) पैसे दिए। गौरतलब है कि इन गेम्स के नियमानुसार पैसा एथलीट को या फिर उसकी यूनिवसिर्टी को जमा करना होता है।

चैंपियंस को भी नहीं मिल रही मदद

आपको बता दें कि झारखंड की प्रियंका केरकेट्टा ने जून 2017 में लखनऊ में हुए 15वें फेडरेशन कप जूनियर एथलेटिक्स चैंपियनशिप की जूनियर गर्ल्स कैटिगरी में 6.30 मीटर लंबी छलांग लगाई थी।

उस वक्त 18 साल की रही प्रियंका अपने छह मे से सिर्फ तीन मौकों पर वैलिड जंप लगा पाई थी लेकिन यह तीन जंप मुंबई में साल 2002 में रुता पाटकर द्वारा बनाए गए 6.25 मीटर के नेशनल रिकॉर्ड को तोड़ने के लिए पर्याप्त थी।

द हिंदू के मुताबिक प्रियंका ने अपने दूसरे मौके में 6.27, चौथे में 6.23 और पांचवें में 6.30 मीटर लंबी छलांग लगाई थी। आपको बता दें कि उस वक्त का सीनियर नेशनल रिकॉर्ड 6.83 मीटर का था जो कि अंजू बॉबी जॉर्ज ने एथेंस 2004 ओलंपिक्स में सेट किया था।

राइटर नोट

यही युवा एथलीट कल को देश के लिए ओलंपिक, एशियन चैंपियनशिप, कॉमनवेल्थ गेम्स में जाएगी। हम उम्मीद करेंगे कि एथलेटिक्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (AFI) इनकी मदद करेगा और इन्हें ऐसे हालात नहीं झेलने पड़ेंगे।

अगर आपको ऐसी कोई उम्मीद है तो रुकिए…नीचे लगा ट्वीट पढ़िए और सोचिए…

हाई जंप के नेशनल रिकॉर्ड होल्डर तेजस्विन शंकर से एशियन एथलेटिक चैंपियनशिप में मेडल की कोई उम्मीद ना रखने वाले शख्स का नाम है आदिल सुमारीवाला। आदिल जी AFI के चीफ हैं यानि कि उन्हें हमारे देश के एथलीट्स का गार्जियन माना जा सकता है। और जब गार्जियन को अपने बेस्ट पर ही भरोसा नहीं है तो वो बाकियों पर कितना भरोसा करता होगा?

इस बयान पर तेजस्विन के ऐतराज के बाद आदिल ट्विटर पर ही तेजस्विन से भिड़ गए थे। साल 2017 में अमेरिका की कंसास स्टेट यूनिवर्सिटी से चार साल की एथलेटिक्स स्कॉलरशिप पाने वाले तेजस्विन वहां अपनी पढ़ाई पूरी कर रहे हैं।

Being National Champion is of NO value

सुमारीवाला के लिए अगर नेशनल चैंपियन की कोई वैल्यू ही नहीं है तो वह किसी एथलीट की मदद क्यों करेंगे? जब वह मदद नहीं करेंगे तो हम मेडल्स की उम्मीद में ऐसे ही बैठे रहेंगे और कोई ना कोई एथलीट हर दिन मदद के इंतजार में रोता रहेगा।

ट्विटर पर सुपरएक्टिव सुमारीवाला अगर थोड़ा सा ध्यान AFI की ऑफिशियल वेबसाइट को अपडेट करने में देते तो हम जैसे खाली लोगों को सही सूचनाएं आसानी से मिल पातीं। इस डॉक्यूमेंट के मुताबिक नेशनल जूनियर रिकॉर्ड्स आखिरी बार 2016 में अपडेट हुए थे। इसके मुताबिक अप्रैल 2017 में।

यह सीनियर रिकॉर्ड्स 2016 की फाइल है। 2016 की दोनों फाइल्स AFI की ऑफिशियल वेबसाइट पर सर्च करके निकली हैं। जबकि 2017 वाली फाइल सीधे गूगल सर्च से। हालांकि गूगल के पास भी सीनियर्स का सबसे लेटेस्ट वर्जन 2016 का ही है।

सुमारीवाला साब ट्विटर पर अपने ही एथलीट्स से भिड़ने की जगह अगर यह वक्त AFI की साइट पर नेशनल रिकॉर्ड्स की PDF फाइल्स अपलोड करने में लगा देते तो इंडियन एथलेटिक्स का कुछ तो भला हो जाता।

फाइल फोटो- मुरली कुमार

Author: सूरज

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