टोक्यो2020 : ओलंपिक मेडल्स के लिए तरस रहे एक खेलप्रेमी देश के लिए कुछ तथ्य

बीती 20-24 मई तक गुवाहाटी में इंडियन ओपन इंटरनेशनल बॉक्सिंग टूर्नामेंट का दूसरा एडिशन हुआ। इसमें 16 देशों के 200 बॉक्सर्स ने हिस्सा लिया। मेंस की 10 और विमिंस की 8 कैटेगरी में हुए इस मुकाबले में इंडियन बॉक्सर्स ने कुल 57 मेडल जीते। टूर्नामेंट के पहले एडिशन में महज 8 मेडल जीतने वाले भारत ने इस बार अपने प्रदर्शन को सात गुना से ज्यादा बेहतर किया।

इस पूरे टूर्नामेंट के दौरान एजेंसी कॉपीज के अलावा कितने हिंदी मीडिया संस्थानों ने इस टूर्नामेंट को कवर किया? टीवी मीडिया को छोड़ दें, पोर्टल्स और अखबारों ने क्या किया? एजेंसी से जो कॉपी आई वही लगी, कहीं कोई चर्चा नहीं, कोई बात नहीं, कुछ भी नहीं।

इग्नोर हो रहा चैंपियन

उससे पहले अप्रैल में एशियन बॉक्सिंग चैंपियनशिप हुई थी जहां हमारे बॉक्सर्स ने अब तक का अपना बेस्ट देते हुए 2 गोल्ड समेत कुल 13 मेडल्स जीते थे। यहां नई कैटेगरी में डेब्यू कर रहे अमित पंघाल और पूजा रानी ने गोल्ड मेडल्स जीते।

अमित इस साल तीन और एशियन गेम्स को मिला लें तो एक साल से कम वक्त में लगातार चार गोल्ड मेडल्स जीत चुके हैं लेकिन पंघाल का इंटरव्यू किसी भी मेनस्ट्रीम मीडिया संस्थान ने नहीं किया (माइनस एजेंसी कॉपी)

राशिद को मिली निराशा

इसी संडे को पूरी फीस देकर, सुप्रीम कोर्ट का आदेश लेकर दिल्ली गोल्फ क्लब पहुंचे दो बार के एशियन चैंपियन गोल्फर राशिद खान को DGC ने प्रैक्टिस नहीं करने दी।

प्रोफेशनल गोल्फ टूर ऑफ इंडिया (PGTI) प्लेयर्स चैंपियनशिप के टॉप रैंक प्लेयर राशिद ने अपनी मदद के लिए पुलिस बुलाई तो पुलिस उल्टा उन्हें ही उठाकर तुगलक रोड पुलिस स्टेशन ले गई। राशिद और उनके साथ के सात प्रोफेशनल और 2 एमेचर गोल्फर्स को कई घंटों तक पुलिस स्टेशन में बिठाने के बाद अंततः शाम में छोड़ा गया।

DGC के रवैये से हताश राशिद ने कहा है कि अगर उन्हें DGC में प्रैक्टिस नहीं करने दी गई तो वह ओलंपिक का सपना त्यागते हुए गोल्फ हमेशा के लिए छोड़ देंगे।

मेडल्स का रोना

टोक्यो 2020 से पहले जमीनी हालात यही हैं। हम चार साल अपने एथलीट्स की जमकर उपेक्षा करते हैं और फिर ओलंपिक के वक्त टीवी के आगे बैठकर उन्हीं एथलीट्स से मेडल्स की उम्मीद करते हैं।

हमारे एथलीट्स और स्पोर्ट्स से हमारे इसी असीम प्यार के चलते हमने 1896 में शुरू हुए ओलंपिक्स में साल 1900 से खेलते हुए अब तक कुल 28 मेडल्स जीते हैं। जी हां, हमने 30 बार ओलंपिक्स में भाग लेकर अब तक कुल 28 मेडल्स बटोरे हैं (Slow Claps).

इन 28 मेडल्स में से 11 तो हॉकी में आए हैं जिसमें आखिरी ओलंपिक मेडल हमने 1980 में जीता था। ऐसे हालात में हम मेडल्स का रोना रोते रहेंगे और साथ ही अपने एथलीट्स को इग्नोर भी करते रहेंगे। पीढ़ियां बीतती जाएंगी… ओलंपिक मेडल्स टैली में इंडिया को नीचे से खोजा जाता रहेगा।

तस्वीर : DGC के गेट के बाहर बैठे राशिद और उनके साथी/राशिद खान ट्विटर

Author: सूरज

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